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Himachal: घर सहित बह गया दो साल का मासूम तो पिता बना रक्षक, मौत के मुंह से बचा लाया

बाढ़ में घर सहित बह गया दो साल का मासूम तो पिता बना रक्षक, मौत के मुंह से बचा लाया

Dharamshala Cloudburst News, खनियारा में शुक्रवार को बादल फटने से आए मलबे की चपेट में कई दुकानें और घर आ गए। इस दौरान एक दो साल का बच्चा भी मलबे की चपेट में आकर बह गया। लेकिन पिता ने अपनी जान जोखिम में डालकर जिगर के टुकड़े को बचा लिया। बादल फटने से जब घुरलू नाले में एकाएक भारी मलबा आ गया तो हलमा गांव के अजय कुमार के घर में सभी लोग मौजूद थे। 

मलबे से अजय कुमार के घर का एक कमरा लगभग बह गया। मलबे ने अजय कुमार के दो साल के बच्चे को भी अपनी चपेट में ले लिया और वह बहने लगा। बच्चे को मलबे में बहता देख पिता अजय कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना बाढ़ में कूद गए व कड़ी मशक्‍कत से बच्चे को बाहर निकाल लिया। बच्चे को शरीर में हल्की चोटें आने के कारण उसे क्षेत्रीय चिकित्सालय धर्मशाला पहुंचाया। वहां डाक्टरों ने जांच के बाद बताया कि बच्चा सुरक्षित है। पिता अजय कुमार के साहस ने बच्चे को बचा लिया।

अतिक्रमण भी नुकसान की वजह

खनियारा में बादल फटने से इंद्रूनाग मंदिर के पास से शुरू हुई प्रलय से खनियारा बाजार से लेकर फाटी व हलमा और बीच में सभी गांवों में कोहराम मचाया। नाले के साथ जो भी घर या दुकानें थीं, सभी को नुकसान हुआ हैं और कई घर मलबे से लबालब भर गए। क्षतिग्रस्त हुए 15 घरों पर तो प्राकृतिक आपदा आई। लेकिन जो दुकानें व खोखे बहे हैं, उसकी वजह कहीं न कहीं अतिक्रमण भी है। इस क्षेत्र में नाले के आस लोगों ने घरों को निर्माण तो नहीं किया है, लेकिन दुकानें एवं खोखे तैयार किए लिए हैं। जिस कारण वे बहे हैं। 

कई साल पहले इस घुरलू नाले को चौड़ाई कहीं अधिक होती थी, लेकिन अब वह सिकुड़ चुका है। इसलिए शुक्रवार को जब मलबा आया तो दुकानें बह गईं। आपदा से विद्युत बोर्ड को भी काफी नुकसान पहुंचा है। विद्युत बोर्ड के दो ट्रांसफार्मर और सात से आठ बिजली के पोल भी बह गए। जिस कारण ट्रांसफार्मर के अधीन आने वाले क्षेत्र की बिजली बंद हो गई। उस क्षेत्र में जो मौजूदा स्थिति है उससे लग रहा है कि अगले दो दिनों तक क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो पाएगी।

घर था खाली, इसलिए बच गई लोगों की जान

भगवान इंद्रूनाग मंदिर से थोड़ी नीचे एक व्यक्ति का दो मंजिला घर बहुत अधिक क्षतिग्रस्त हुआ है। व्यक्ति परिवार के साथ एक मंजिल में रहता है, जबकि दूसरी मंजिल में किरायेदार रहते हैं। गनीमत यह रही कि जिस समय नाला रौद्र रूप में आया, उस समय घर में न तो घरवाले थे और न ही किरायेदार, अन्यथा बड़ा नुकसान भी हो सकता था।

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