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आज के दिन होती है चित्रगुप्त पूजा, जानिए इसका महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

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भाई दूज के साथ आज के दिन भगवान चित्रगुप्त का भी पूजन किया जाता है और इसे चित्रगुप्त पूजा कहते हैं. चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व है और इन्हें कलम के आराध्य देव के तौर पर पूजा जाता है. यह त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन मनाया जाता है और इस दिन लोग चित्रगुप्त का पूजन लेखनी के रूप में करते हैं. इस दिन भगवान के समक्ष अपनी आमदनी और खर्चों का ब्योरा रखा जाता है. साथ ही नए बहिखातों पर ‘श्री’ लिखकर उन्हें भगवान चित्रगुप्त के सामने रखा जाता है और उनसे बरकत का आशीर्वाद मांगा जाता है.

चित्रगुप्त पूजा 2022 शुभ मुहूर्त इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि आज यानि 27 अक्टूबर को है. आज के दिन भाई दूज के साथ ही चित्रगुप्त पूजा भी की जाएगी. यह पूजा यदि शुभ मुहूर्त में की जाए तो अधिक फलदायी होती है. आज सुबह 7 बजकर 27 मिनट से लेकर 28 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 33 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा. इसके अलावा सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक अभिजित मूहूर्त रहेगा. ऐसे में यह दोनों ही मुहूर्त पूजा के लिए शुभ हैं.

चित्रगुप्त पूजा विधि स्नान करके परिवार पूजा के लिए बैठता है. भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति के सामने पूजा की थाल सजाई जाती है. एक थाल में अछत, पुष्प, रोली, हल्दी, चंदन, गुड़, दही, इत्र इत्यादि पूजन सामग्री रखकर एक सादे पन्ने पर भगवान चित्रगुप्त की तस्वीर बनाते हैं. परिवार का सबसे बुजुर्ग व्यक्ति उस पर ॐ चित्रगुप्ताय नमः फिर राम राम राम राम राम राम लिख कर पूरे पन्ने को भर देता है. इसी को अन्य सदस्य दोहराते हैं. इसके बाद हवन और भगवान चित्रगुप्त की आरती होती है.

इस पूजा का खास महत्व कायस्थों में माना जाता है क्योंकि कायस्थों की उत्पत्ति चित्रगुप्त से मानी जाती है. इसके लिए उनके लिए यह पूजन काफी विशेष माना जाता है. मान्यता के मुताबिक महाभारत में शर-शैया पर पड़े पितामह भीष्म ने भगवान चित्रगुप्त का विधिवत पूजन किया था जिससे उन्हें मुक्ति मिल सके. इसके लिए यह पूजन बल, बुद्धि, साहस और शौर्य के लिए काफी अहम माना जाता है. वहीं पुराणों और ग्रंथों में इस पूजन के बिना की गई कोई भी पूजा अधूरी मानी गई है.

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