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गांधी जयंती पर कैसे तैयार करें भाषण, गांधी जयंती पर भाषण हिंदी में, जल्दी से हो जाएगा याद

गांधी जयंती पर कैसे तैयार करें भाषण, गांधी जयंती पर भाषण हिंदी में, जल्दी से हो जाएगा याद


Gandhi Jayanti Speech In Hindi : गांधी जयंती पर भाषण हिंदी में, जल्दी से हो जाएगा याद

Gandhi Jayanti Speech In Hindi: देशभर में 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। देशभर में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अवकाश होता है। महात्मा गांधी के बलिदान और देश को आजादी कराने में उनके बेहद महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपिता का ओहदा दिया गया है।

यह दिन पूरे देश में मनाया जाता है और इसे राष्ट्रीय अवकाश के रूप में चिह्नित किया जाता है। इस दिन को चिह्नित करने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महात्मा गांधी जी को याद करने के लिए स्कूल और कॉलेज विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे निबंध लेखन, भाषण पाठ आदि की मेजबानी करके दिन मनाते हैं। इस विशेष अवसर पर, हम गांधी जयंती मनाने के लिए स्कूली बच्चों और शिक्षकों के लिए कुछ भाषण और निबंध विचार लेकर आए हैं।

Gandhi Jayanti 2022: महात्मा गांधी जयंती पर कैसे तैयार करें भाषण, यहां देखें टिप्स


इन विषयों पर आप भाषण दे सकते हैं -( Gandhi Ji Speech Ideas )
गांधी जी का 21वीं सदी में अर्थ
गांधी जी के आंदोलन जिन्होंने जिलाई आजादी,
गांधी जी का विद्यार्थियों को मैसेज
मानवता और गांधी जी
गांधी जी की आज के दौर में प्रासंगिकता
बापू और अहिंसा
बैरिस्टर से लेकर एक राष्ट्र के पिता तक का सफर.
शिक्षा पर गांधी जी के विचार
मानव जाति के लिए गांधी के संदेश
'अछूत' प्रथा पर गांधी की विचारधारा
हरिजन कल्याण में गांधी जी का योगदान
गांव के जीवन को लेकर गांधी जी के विचार
एक समाज सुधारक के तौर पर गांधी जी

भाषण के लिए जरूरी टिप्स


1. अपने निबंध/भाषण को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें।
2. किसी भी त्रुटि से बचने के लिए भाषण का 2-3 बार अभ्यास करें।
3. इसे सरल रखें ताकि दर्शक समझ सकें
4. कुशलता से बात करें और आश्वस्त रहें।
5. उन शब्दों को लिखें जिन्हें आप जोश और उत्साह के साथ बोल सकते हैं।


इस तरह तैयार करें भाषण


1. यहाँ उपस्थित सभी को सुप्रभात, आज गांधी जयंती के विशेष अवसर पर हम स्वतंत्रता के वीर और आदर्शवादी नेता महात्मा गांधी जी को याद करते हैं। इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसे बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। 2 अक्टूबर का दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज ही के दिन गुजरात के पोरबंदर में गांधी जी का जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी है। ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता में उनके प्रमुख योगदान ने लोगों को उन्हें ‘बापू, राष्ट्रपिता’ और गांधी जी के रूप में संबोधित किया। उन्होंने अपने पवित्र, विचारशील, शांतिपूर्ण और अहिंसा नैतिकता और मूल्यों के माध्यम से दुनिया को प्रेरित किया।

2. सुप्रभात शिक्षकों, छात्रों और मेरे प्यारे दोस्तों, आज हम अपने देश के नेता महात्मा गांधी की जयंती मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजों से देश की स्वतंत्रता प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। आज हम सभी के लिए एक अवसर है, महानतम नेता को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने का, जिन्होंने देश की भलाई के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

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खुद पर विश्वास और लहजे में शराफत थी,गाँधी जी से ज्यादा उनके विचारों में ताकत थी.
सत्यअहिंसा की राह बताने वाले,बिना लड़े आजादी दिलाने वाले
पने दिल से नफरत को मिटायें,गांधी के विचारों को दिल में बसाये
आज भी गांधी जी के विचारदेश को ऊर्जावान बनाते है.
गांधी जी भारत के लिए वरदान है,तभी तो इनका अमिट सम्मान है.
महात्मा गांधी की लड़ाई आज भी जारी है,सत्यअहिंसा की लाठी हर हथियार पर भारी है.

Gandhi Jayanti: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153वीं जयंती आज, राष्ट्रपति मुर्मू ने देश के लोगों को दी बधाई


आज पूरा देश राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी की 153वीं जयंती मना रहा है। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था।

पूरा देश राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी की 153वीं जयंती मना रहा है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में हुआ था। महात्मा गांधी की जयंती प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाई जाती है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने देश के लोगों को दी बधाई

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर देश के लोगों को बधाई दी। देश के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा यह सभी के लिए शांति, समानता और सांप्रदायिक सद्भाव के मूल्यों के लिए खुद को फिर से समर्पित करने का अवसर है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस साल गांधी जयंती मनाने का एक विशेष महत्व है। पूरा देश आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। यह समय हम सभी के लिए गांधी जी के सपनों के भारत को साकार करने की दिशा में काम करने का है।

गांधी जी किसे मानते थे अपना राजनीतिक गुरु ? जानें बापू के जीवन से जुड़े और ऐसे सवालों के जवाब


प्रश्न-गांधी जी अपना राजनीतिक गुरु किसे मानते थे ?
उत्तर-गोपाल कृष्ण गोखले को

प्रश्न-गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब लौटे ?
उत्तर- साल 1915 में

प्रश्न- गांधी जी का भारत में पहला आंदोलन कौन सा था ?
उत्तर- चंपारण सत्याग्रह

प्रश्न- गांधी जी को महात्मा की उपाधि किसने दी ?
उत्तर- रवींद्रनाथ टैगोर ने

प्रश्न- असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ था ?
उत्तर- असहयोग आंदोलन 1920 में शुरू हुआ था.

प्रश्न- महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष कब बने ?

उत्तर- 1924 में

प्रश्न-किस आंदोलन के समय गांधी जी ने कहा था कि मेरे जीवन का यह अंतिम संघर्ष होगा ?
उत्तर- भारत छोड़ो आंदोलन

प्रश्न- गांधी जी को अधनंगा फकीर किसने कहा था ?
उत्तर- चर्चिल ने

प्रश्न- गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रयोग पहली बार कहां किया था ?
उत्तर-दक्षिण अफ्रीका में

प्रश्न-गांधी जी ने पहली बार किस आंदोलन में भूख हड़ताल की ?
उत्तर- अहमदाबाद आंदोलन

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1- अगर मुझे विश्वास है कि मैं इसे कर सकता हूं तो मैं निश्चित रूप से इसे करने की क्षमता हासिल कर लूंगा, भले ही मेरे पास शुरुआत में यह न हो।

2- किसी भी एक ही कार्य से किसी के दिल को सुख देना प्रार्थना में झुके हुए हज़ार सिरों से बेहतर है।

3- जब भी आपका किसी विरोधी से सामना हो तो उसे प्यार से जीतने का प्रयास करें।

4- अगर हमें इस दुनिया को वास्तविक शांति सिखाना है और हमें युद्ध के खिलाफ एक वास्तविक युद्ध करना है तो इसकी शुरुआत हमें बच्चों से करनी होगी।

5- जी भर के जीयें और इस तरह से सीखे जैसे कि आपको इस पृथ्वी पर हमेशा रहना है।

6- उस स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं यदि आपको गलती करने की स्वतंत्रता शामिल नहीं है।

7- शारीरिक क्षमता से नहीं आती है बल्कि ताकत एक अदम्य इच्छा शक्ति से आता है।

8- आप तब तक किसी का महत्व नहीं समझते जब तक आप उन्हें खो नहीं देते।

9- आप कभी नहीं जान सकते कि आपके कार्यों का क्या परिणाम होता है, लेकिन यदि आप कुछ नहीं करते हैं, तो कोई परिणाम नहीं होगा।

10- मैं किसी के स्वाभिमान की हानि से बड़ी हानि की कल्पना नहीं कर सकता।

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मोहनदास करमचंद गांधी का बचपन

गांधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। वह बचपन से पढ़ाई में होनहार छात्र नहीं थे। गणित और भूगोल में कमजोर हुआ करते थे। उनकी लिखावट भी सुंदर नहीं थी। अक्सर उन्हें पढ़ाई और लिखावट के कारण डांट पड़ा करती थीं। हालांकि वह अंग्रेजी में निपुण छात्र थे। अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान होने के कारण उन्हें कई पुरस्कार और छात्रवृत्तियां मिल चुकी थीं।

गांधी जी का परिवार:  वह महज साल के थे, तो उनकी शादी पोरबंदर के एक व्यापारी परिवार की बेटी कस्तूरबा से कर दी गई। कस्तूरबा मोहनदास से उम्र में 6 माह बड़ी थीं। उसके बाद साल की उम्र में ही गांधी जी एक बेटे के पिता बन गए। लेकिन उनका यह पुत्र जीविन नहीं रहा था। बाद में कस्तूरबा और गांधी जी के चार बेटे हुए, जिनके नाम हरिलाल, मनिलाल, रामलाल और देवदास था। गांधी जी शादी के बाद पढ़ने के लिए विदेश चले गए, जहां से वह वकालत की पढ़ाई करके वापस आए।

गांधीजी के आंदोलन: 1906 में महात्मा गांधी ने ट्रासवाल एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट के खिलाफ पहला सत्याग्रह चलाया। गांधी जी ने नमक पर ब्रिटिश हुकूमत के एकाधिकार के खिलाफ 12 मार्च 1930 को नमक सत्याग्रह चलाया, जिसमें वे अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों तक पैदल मार्च निकाला। देश की आजादी के लिए 'दलित आंदोलन', 'असहयोग आंदोलन', 'नागरिक अवज्ञा आंदोलन', 'दांडी यात्रा' और 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किए।

महात्मा गांधी को पहली बार राष्ट्रपिता किसने कहा:  गांधी जी के आंदोलनों के चलते पूरे देश में वह प्रसिद्ध होने लगे थे। कई गरम और नरम दल के नेता गांधी जी से प्रभावित थे और उनका सम्मान करते थे। इन्हीं में एक थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस। 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो स्टेशन के जरिए पहली बार महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया गया था। गांधी को राष्ट्रपिता कहने वाले नेताजी सुभाषचंद्र बोस थे। उस दौरान नेताजी ने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी और रेडियो के जरिए महात्मा गांधी से आशीर्वाद मांगा था। अपने भाषण के अंत में सुभाष चंद्र बोस ने कहा, 'हमारे राष्ट्रपिता, भारत की आजादी की पवित्र लड़ाई में मैम आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की कामना कर रहा हूं।'

गांधी जी का अंत

आखिरकार गांधी जी समेत कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान सफल हुआ और 15 अगस्त 1947 में भारत को आजादी मिल गई। उसके बाद 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या कर दी। अहिंसा का संदेश देने वाले इस महान विभूति के जीवन का अंत हो गया। इसी के साथ नेताजी द्वारा पहली बार राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी देश के हर नागरिक के लिए राष्ट्रपिता बन गए।


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