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जिला अस्पताल में कोविड वार्ड में काम करने वाला बन गया आईएएस, चार बार हुए थे फेल

जिला अस्पताल में कोविड वार्ड में काम करने वाला बन गया आईएएस, चार बार हुए थे फेल

UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग को सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है और कुछ उम्मीदवारों को इसे पास करने के लिए कई साल तक कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. ऐसी है केरल के कोझिकोड जिले के रहने वाले डॉ मिथुन प्रेमराज की कहानी, जिन्होंने अपनी मेडिकल परीक्षा के बाद यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया, लेकिन चार बार असफल रहे और आखिर में पांचवें प्रयास में सफल हुए और इस तरह एक आईएएस अधिकारी बने.

मिथुन प्रेमराज बचपन से ही होनहार स्टूडेंट रहे. 12 वीं क्लास के बाद, उन्होंने पुडुचेरी में जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) में मेडिकल की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, नई दिल्ली से पब्लिक हेल्थ में डिप्लोमा किया.

केरल के कोझिकोड जिले के वातकरा के रहने वाले मिथुन प्रेमराज डॉक्टरों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता डॉ प्रेमराज एक प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ हैं और उनकी बहन अश्वथी मुक्कम में केएमसीटी मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग में एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर हैं.

मिथुन प्रेमराज ने कहा, 'मैंने मेडिकल की पढ़ाई 2015 में पूरी की, लेकिन मेरा सपना आईएएस ऑफिसर बनने का था. फिर मैंने इसकी तैयारी शुरू की और परिवार मेरे साथ जुड़ गया.'

यूपीएससी परीक्षा पास करना मिथुन प्रेमराज के लिए आसान नहीं था. एक साल की तैयारी के बाद 2016 में उसने पहली बार परीक्षा दी, लेकिन वह असफल रहे. तीन बार वे इंटरव्यू राउंड में भी पहुंचे लेकिन असफल रहे. आखिरकार पांचवें प्रयास में वे 2020 में सफल हुए और ऑल इंडिया रैंक 12 हासिल कर आईएएस अधिकारी बने.

30 साल के डॉ मिथुन प्रेमराज ने कोझिकोड निगम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और वातकरा के जिला अस्पताल में काम किया है. सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू की तैयारी करने से पहले 2020 में उन्होंने जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भी काम किया था.a

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