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ये है विश्व का एकमात्र ग्रेनाइट से बना अनोखा मंदिर

यहां के चमत्कार के आगे वैज्ञनिकों नें भी अपने घुटने टेक दिए हैं। ये है तमिलनाडु के तंजौर का शिव मंदिर जिसे बृहदेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है।

भारत में अनेक चमत्कारी व अद्भुत मंदिर हैं लेकिन, एक ऐसा शिव मंदिर भी है जो विश्व में ग्रेनाइट से बना अनोखा एकमात्र है। वहीं इस मंदिर की खास बात ये भी है कि इस मंदिर के चमत्कार के आगे वैज्ञनिकों ने भी अपने घुटने टेक दिए हैं। दरअसल तमिलनाडु के तंजौर जिले में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर कई लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है। क्योंकि इसका आश्चर्य आजतक किसी को समझ नहीं आया।

कहा जाता है की हम वैज्ञानिक काल में जी रहे हैं जहां असंभव को भी संभव किया जा सकता है। लेकिन इस मंदिर के चमत्कार के आगे वैज्ञनिकों नें भी अपने घुटने टेक दिए हैं। तमिलनाडु के तंजौर में स्थित यह शिव मंदिर बृहदेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह प्रसिद्ध मंदिर ग्यारहवीं सदी के आरंभ में बनाया गया था।

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है की इस विशाल मंदिर को हजारों टन ग्रेनाइट से बनाया गया है और इसे जोड़ने के लिए ना तो किसी ग्लू का इस्तेमाल किया गया है और ना ही सीमेंट का, फिर सोचने वाली बात है की इस मंदिर को आखिर किस चीज़ से जोड़ा गया है तो आपको बता दें की मंदिर को पजल्स सिस्टम से जोड़ा गया है।

प्राचीन मंदिरों में से एक है बृहदेश्वर मंदिर। यह मंदिर दक्षिण भारत में स्थित प्राचीन वास्तुकला का एक नायाब नमूना है। यह तमिलनाडु के तंजौर में स्थित है जो 11वीं सदी के आरम्भ में बनाया गया था। विश्व में यह अपनी तरह का पहला और एकमात्र मंदिर है जो कि ग्रेनाइट का बना हुआ है।

इस विशेष तकनीक से जुड़े हैं इसके पत्थर
इस मंदिर को लगभग 13 लाख टन ग्रेनाइट के पत्थरों से बनाया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि तंजौर में आस-पास 60 किमी तक न कोई पहाड़ और न ही पत्थरों की कोई चट्टानें हैं। बताया जाता है कि यहां 3 हजार हाथियों की मदद से इन पत्थरों को यहां लाया गया था।

बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास History of Brihadeshwara Temple
बताया जाता है कि बृहदेश्वर मंदिर का चोल राजा राजराजा प्रथम द्वारा सन 1003 ईस्वी से 1010 ईस्वी के बीच किया गया था। चालुक्य युग के शासन में 5 वीं से 9 वीं शताब्दी के बीच में हिंदू मंदिरों का बहुत विकास हुआ। इस समय के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक मंदिरों का निर्माण किया गया था। चालुक्य शासन का समय काल हिन्दू मंदिरों का स्वर्णिम काल था। चालुक्य वंश के बाद सन 850 ईस्वी से 1280 ईस्वी के बीच चोल राजवंश का विकास हुआ, उन्होंने भी अपनी भू-राजनीतिक सीमाओं को सुरक्षित करने और वास्तुकला का प्रचार प्रसार करने पर अधिक जोर दिया। अपनी धार्मिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए प्रथम चोल राजा ने दक्षिण भारतीय शैली में बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया।

बृहदेश्वर मंदिर में मनाए जाने वाले त्यौहार Festivals celebrated at Brihadeeswarar Temple

1- चित्राई ब्रमोथ्सवम, यह त्यौहार अप्रैल से मई के बीच में 18 दिनों तक मनाया जाता है।

2- शिवराथिरी, यह त्यौहार फरवरी में 1 दिन के लिए मनाया जाता है।

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