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ये दो गलतियां छीन लेंगी आपका सुख-चैन, जीवन भर नहीं मिलेंगी खुशियां

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आचार्य चाणक्य के लोकप्रिय नीति शास्त्र ‘चाणक्य नीति’ में उनके जीवन का अनुभव और नीतियों का संग्रह है. इन नियमों व नीतियों को अपनाकर कई लोगों ने सफलता हासिल की है. अगर आप भी अपना जीवन सुखमय बनाना चाहते हैं तो चाणक्य नीति के कुछ महत्वपूर्ण नियमों का जरूर पालन करें. आचार्य चाणक्य की नीतियां आपको गलत राह पर चलने से रोकती हैं और साथ ही जीवन के कुछ कड़वे सच में सामने लाती है. चाणक्य नीति में बताया गया है कि कौन सी गलती मनुष्य का सुख-चैन खत्म कर सकती हैं. इसलिए समय रहते ही इन गलतियां को करने से बचना चाहिए.

मान-सम्मान का डर

चाणक्य नीति में बताया गया है कि मनुष्य को जीवन में कभी कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिसकी वजह से उसका और उसके परिवार का मान-सम्मान खतरे में आ जाए. क्योंकि सम्मान पर लगा दाग जीवन भर दुख देता है और इसकी वजह से कई पीढ़ियों को परेशानी झेलनी पड़ती है. अगर गलती से भी कोई गलत काम हो जाए तो उसे जल्द ही जल्द ठीक करने की कोशिश करें ताकि बदनामी से बचा जा सके. कहते हैं कि मनुष्य सम्मान के लिए जीवन भर मेहनत करता है. लेकिन किसी वजह से हुई बदनामी उसके जीवन भर की कमाई मिट्टी में मिला देती है. आपके सुख-चैन को बर्बाद कर देता है.

धोखेबाज जीवनसाथी

आचार्य चाणक्य का कहना है कि खुशहाल जीवन के लिए एक अच्छा और समझदार जीवनसाथी होना जरूरी है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि जीवनसाथी वफादार होना चाहिए. यदि स्त्री या पुरुष विवाह के बाद भी अपने साथी के होते हुए पराए लोगों पर नजर रखते हैं या संबंध रखते हैं तो वह अपना घर खुद ही बर्बाद कर लेते हैं. क्योंकि चरित्र पर लगा हुआ दाग लाख कोशिशों के बाद भी नहीं हटता और इसका परिणाम पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है. इसलिए अगर जीवनसाथी धोखा दे रहा है तो बिना समय बर्बाद किए ऐसे इंसान से दूरी बन लेना ही बेहतर है. क्योंकि उसके साथ आपका जीवन केवल दर्द और तकलीफों में ही बीतेगा.

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