5 साल से बड़ा है बच्चा तो सेक्स एजुकेशन से जुड़ी ये बातें जरूर बताएं पेरेंट्स
अगर आप भी इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो आपको बता दें कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से स्टेप बाय स्टेप सेक्स एजुकेशन देने की शुरुआत करनी चाहिए। खासतौर पर 5 साल की उम्र के बाद बच्चों को कुछ जरूरी बातें आसान भाषा में समझाना शुरू किया जा सकता है। आइए विस्तार में जानते हैं -
खेल हमेशा खुले में और सुरक्षित जगह पर हो
5 साल की उम्र के बच्चे खेलना पसंद करते हैं और इस दौरान वे दूसरे बच्चों या बड़ों के साथ आसानी से घुल-मिल जाते हैं। ऐसे में उन्हें शुरुआत से ही सुरक्षित और असुरक्षित स्थिति के बीच का फर्क समझाना जरूरी है। बच्चे को बताएं कि खेलने के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां आसपास लोग मौजूद हों और जरूरत पड़ने पर मदद मिल सके। अगर कोई बच्चा या बड़ा उसे कहीं छिपकर खेलने के लिए बुलाए या कहे कि इस बारे में किसी को नहीं बताना है, तो बच्चे को वहां से दूर हो जाना चाहिए। उसे यह भी समझाएं कि ऐसी कोई बात होने पर वह घर आकर तुरंत पेरेंट्स को बताए।
गुड टच और बैड टच के बारे में बताएं
इस उम्र में बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जरूर समझाना चाहिए। बच्चे को बताएं कि अगर किसी के छूने से उसे डर, परेशानी या अनकंफर्टेबल महसूस होता है, तो उस सिचुएशन में तुरंत वहां से हट जाना चाहिए। बच्चे को यह भी समझाएं कि भले ही कोई जान-पहचान का व्यक्ति भी आपको छुए और आपको अनकंफर्टेबल फील हो, तो वो वहां से हट जाएं और पेरेंट्स को इस बारे में जरूर बताएं।
शरीर के अंगों के सही नाम बताएं
बच्चों को उनके बॉडी पार्ट्स के सही नाम पता होने चाहिए। खासतौर पर प्राइवेट बॉडी पार्ट्स के लिए साफ और सही नाम इस्तेमाल करें। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर कभी बच्चा किसी परेशानी के बारे में बताना चाहे, तो वह अपनी बात साफ तरीके से बता सके। माता-पिता को भी बच्चे की बात समझने और उसकी मदद करने में आसानी होगी।
स्विमिंग सूट का नियम समझाएं
बच्चे को शरीर की प्राइवेसी समझाने के लिए स्विमिंग सूट वाला नियम एक आसान तरीका हो सकता है। उसे बताएं कि शरीर के जिन पार्ट्स को अंडरवियर या स्विमिंग सूट ढकता है, वो प्राइवेट पार्ट्स हैं। इन हिस्सों को ले कर बच्चे को अपनी प्राइवेसी के बारे में जानकारी होनी चाहिए। बच्चों को समझाएं कि उसके प्राइवेट पार्ट्स को कोई भी छू नहीं सकता, फिर चाहे वह कोई जान पहचान का ही व्यक्ति क्यों ना हो।
बच्चे को 'ना' कहना सिखाएं
बच्चों को समझाएं और यह भरोसा दें कि अगर उन्हें किसी का कोई बिहेवियर पसंद नहीं आता, या किसी का टच उन्हें अनकंफर्टेबल फील कराता है, तो वह साफ शब्दों में उस व्यक्ति को ना कह सकते हैं। फिर चाहे वह व्यक्ति कोई रिश्तेदार हो, जान पहचान का हो, उम्र में बड़ा हो या फिर हम उम्र हो। बच्चों को 'ना' कहना आना चाहिए।
शरीर से जुड़ी बात को सीक्रेट ना रखें
बच्चों को समझाएं कि अगर कोई व्यक्ति शरीर से जुड़ी किसी बात को छिपाने के लिए कहता है, तो उसे यह बात अपने तक नहीं रखनी चाहिए। खासतौर पर अगर कोई कहे कि मम्मी-पापा को मत बताना या किसी को बताया तो अच्छा नहीं होगा, तो बच्चे को तुरंत यह बात अपने पेरेंट्स को बतानी चाहिए।
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