बच्चे को बारबार फोन नहीं, ये 5 काम करने को दें! खेलखेल में बेहतर होगा दिमागी विकास!
ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि बच्चा खेलते-खेलते नई चीजें सीखे और पूरे दिन एक्टिव भी रहे, तो छोटी-छोटी ऑफलाइन एक्टिविटी बहुत काम आ सकती हैं। चाइल्ड साइकियाट्रिस्ट डॉ. गायत्री राठौड़ ने कुछ ऐसी ही आसान और मजेदार एक्टिविटी बताई है जो बच्चों की थिंकिंग, मेमोरी और कैंडिडेंट्स को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। आइए जानते हैं वो एक्टिविटीज कौन सी है, जो स्क्रीन टाइम की जगह बच्चों के लिए कहीं ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
ट्रेजर हंट हो सकता है मजेदार
डॉ. गायत्री राठौड़ के अनुसार ट्रेजर हंट बच्चों के लिए एक शानदार एक्टिविटी हो सकती है। इसके लिए बस घर में छोटी-छोटी चीजें या क्लू छिपाकर बच्चे को उन्हें ढूंढ़ने के लिए कहें। यह एक मजेदार खेल है, लेकिन इसके साथ बच्चा ध्यान लगाना, चीजों को याद रखना और सही तरीके से सोचकर हल निकालना भी सीखता है। बच्चे को यह खेल खेलने में मजा भी आएगा और उसका दिमाग भी अच्छी तरह एक्टिव रहेगा।
गार्डनिंग से जिम्मेदारी सीखते हैं बच्चे
अगर घर में जगह है तो बच्चे से एक छोटा पौधा लगवाएं और उसकी रोज देखभाल करने के लिए कहें। डॉ. गायत्री के मुताबिक इससे बच्चा जिम्मेदारी लेना सीखता है। साथ ही उसमें धैर्य आता है और वह पौधे में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को ध्यान से देखना भी सीखता है। इससे बच्चे का नेचर के साथ बॉन्ड भी बढ़ता है।
घर में बनाएं छोटा ऑब्स्टेकल कोर्स
एक्सपर्ट बताती हैं कि तकिया, कुशन और कुर्सियों की मदद से घर में एक छोटा-सा ऑब्स्टेकल कोर्स बनाया जा सकता है। फिर बच्चे को उसे पार करने के लिए कहें। इस एक्टिविटी से बच्चे का बैलेंस बेहतर होता है, शरीर का तालमेल बढ़ता है और उसका कॉन्फिडेंस भी स्ट्रॉन्ग होता है। साथ ही बच्चे की अच्छी-खासी फिजिकल एक्टिविटी भी हो जाती है।
बच्चों को साथ ले कर करें कुकिंग
पेरेंट्स किचन की कुछ आसान जिम्मेदारियां बच्चों के साथ शेयर करें। जैसे आटा मिलाना, सब्जियां धोना या चीजों की गिनती करना। डॉ. गायत्री के अनुसार ऐसी छोटी-छोटी एक्टिविटीज से बच्चे के हाथों की पकड़ और काम करने की क्षमता बेहतर होती है। साथ ही गिनती जैसी शुरुआती गणित की समझ भी बढ़ती है और बच्चा धीरे-धीरे खुद छोटे काम करना सीखता है।
बेडशीट और तकियों से बनाएं फोर्ट
बच्चों को बेडशीट, तकिए और कुर्सियों की मदद से अपना छोटा-सा फोर्ट बनाने दें। एक्सपर्ट का कहना है कि यह एक्टिविटी बच्चों की क्रिएटिव सोच को बढ़ाने का शानदार तरीका है। बच्चा खुद प्लान बनाता है, चीजों को कैसे जोड़ना है यह सोचता है और अपनी इमेजिनेशन का इस्तेमाल करता है। इस तरह की ओपन-एंडेड एक्टिविटी स्क्रीन देखने की तुलना में बच्चे के दिमाग को ज्यादा एक्टिव रखती है।
नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।
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