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लीवर की खामोशी को हल्के में ना लें, जानिए हेपेटाइटिस से जुड़ी जरूरी बातें!!


हमारा लीवर बिना रुके दिन-रात शरीर के लिए कई जरूरी काम करता है, लेकिन इसकी सेहत पर हमारा ध्यान अक्सर तब जाता है, जब कोई गंभीर परेशानी सामने आ जाती है। यही वजह है कि हेपेटाइटिस जैसी बीमारी को कई लोग समय रहते पहचान नहीं पाते।

कई मामलों में इसके शुरुआती लक्षण भी बहुत हल्के होते हैं, जिससे बीमारी लंबे समय तक बिना जानकारी के बढ़ती रहती है।

लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने, समय पर जांच कराने और सही इलाज का महत्व समझाने के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, इस साल की थीम, हेपेटाइटिस के लक्षण, कारण और इससे बचाव के आसान उपाय।

विश्व हेपेटाइटिस दिवस क्यों मनाया जाता है?

हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूक करने, समय पर जांच कराने और सही इलाज अपनाने का संदेश देता है। यह तारीख हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज करने वाले वैज्ञानिक बारूक सैम्युअल ब्लमबर्ग के जन्मदिन के सम्मान में चुनी गई है। इस साल की थीम 'Hepatitis: Let's break it down' है।

हेपेटाइटिस क्या है?

हेपेटाइटिस लीवर में होने वाली सूजन है। यह मुख्य रूप से पांच प्रकार के वायरस (ए, बी, सी, डी और ई) की वजह से हो सकता है। इनमें बी, सी और डी लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे लीवर खराब होने या लीवर के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षण

  1. थकान महसूस होना: बिना ज्यादा काम किए भी लगातार थकान रहना इसका एक संकेत हो सकता है।
  2. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना: अगर त्वचा या आंखों का सफेद हिस्सा पीला दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • भूख कम लगना: अचानक भूख कम होना या खाना खाने का मन न करना भी लक्षण हो सकता है।
  • पेट में दर्द या सूजन: खासतौर पर दाईं ओर ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है।
  • गहरा रंग का पेशाब: अगर पेशाब का रंग सामान्य से ज्यादा गहरा हो जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्यों जरूरी है जागरूकता?

WHO के अनुसार, हेपेटाइटिस बी और सी से दुनिया भर में करोड़ों लोग प्रभावित हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को अपने संक्रमण की जानकारी ही नहीं होती। इसलिए समय पर जांच, इलाज और जागरूकता इस बीमारी को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।

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